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Tuesday, January 7, 2014

स्त्री संवेदना की खाकी

अरुणा बहुगुणा भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारियों को प्रशिक्षण देने वाली शीर्ष संस्था राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (एनपीए) को पहली महिला निदेशक बनने जा रही हैं। उनका का नाम जिस तरह से अचनाक चर्चा में आया, उससे दो बातें जाहिर होती हैं। एक तो यह कि महिलाओं के लिए अब शायद ही कोई क्षेत्र ऐसा बचा है जिसमें वे चोटी पर नहीं पहुंची हैं। भारत जैसे देश के लिए जो अब भी विकास का सिरमौर नहीं बल्कि उसकी रेस में शामिल भर है, यह और भी बड़ी बात है। दूसरी बात यह कि अब भी जब किसी क्षेत्र में किसी महिला को बड़ा पद या सम्मान मिलता है तो हम कहीं न कहीं चौंक उठते हैं। ऐसा महिलाओं की क्षमता के प्रति अंदर बसे पूर्वाग्रह के कारण है। हमें यह बड़ी बात इसलिए लगती है क्योंकि आमतौर पर आधी दुनिया की काबिलियत को लेकर हमारा नजरिया संदिग्ध रहता है।
बहरहाल बात अरुणा बहुगुणा की। कुछ दिनों तक यह नाम किसी तरह की चर्चा में शामिल नहीं था। आज गूगल सर्च पर उनका नाम लिखते ही तकरीबन पचास हजार पन्ने खुलते हैं। इन वेब इंट्रीज में उनकी तस्वीरें, उनके लिए बधाइयां और उनके बारे में काफी तरह की जानकारियां शामिल हैं। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की विशेष महानिदेशक अरुणा बहुगुणा एनपीए का 28वां निदेशक बनेंगी। 1979 बैच की आंध्र प्रदेश कैडर की आइपीएस अफसर अरुणा फिलहाल दिल्ली में तैनात हैं।
हैदराबाद स्थित 65 साल पुराने एनपीए को सरदार वल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी के नाम से भी जाना जाता है। अरुणा को एनपीए का निदेशक नियुक्त करने संबंधी आदेश जल्द ही जारी किए जाने की संभावना है। गत नवंबर में सुभाष गोस्वामी को भारत-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) का महानिदेशक नियुक्त किए जाने के बाद से ही एनपीए निदेशक का पद रिक्त है। शंकर सेन, त्रिनाथ मिश्रा, के विजय कुमार जैसे चर्चित आईपीएस अधिकारी एनपीए के प्रमुख रह चुके हैं।
अरुणा 1977 बैच के पश्चिम बंगाल कैडर के आईपीएस अधिकारी एस जयरामण की पत्नी हैं। जयरामण केंद्रीय गृह मंत्रालय में विशेष सचिव की हैसियत से आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अरुणा को लेकर यह बात महत्वपूर्ण है कि उन्हें काबिलियत के मुताबिक अब तक कम ही अवसर दिए मिले हैं। इस कारण वह लंबे समय तक महज एक सामान्य अधिकारी के रूप में यहां-वहां काम करती रहीं। अरसे तक तक महत्वहीन पदों पर रहने के बाद अरुणा को अब निश्चित रूप से बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले वह आंध्र प्रदेश में विशेष पुलिस बल में अतिरिक्त डीजी की हैसियत से काम कर चुकी हैं। फिलहाल वह सीआरपीएफ की अतिरिक्त महानिदेशक हैं। वह अग्निशमन दस्ते में भी काम कर चुकी हैं। उनकी नई भूमिका निश्चत रूप से उनके लिए चुनौतीपूर्ण होगी।
राष्ट्रीय पुलिस अकादमी देश भर में पुलिस सेवा में शामिल होने वाले अधिकारियों को हर उस तरह की ट्रेनिंग देने के लिए बनाया गया है, जिससे वे अपने कार्यक्षेत्र में किसी भी तरह की चुनौती का सामना कर सकें। आज देश में जिस तरह से अपराध का ग्राफ बढ़ रहा है, अपराध करने के तरीके बढ़ रहे हैं, उसमें पुलिस का काम काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। खासतौर पर महिलाओं को लेकर जिस तरह की संवेदनहीनता पूरे समाज में बढ़ी है, उससे पुलिस की मुश्किल काफी बढ़ गई है।
अरुणा खुद एक महिला हैं और वह इन स्थितियों को भली भांति समझती हैं। वह यह भी समझती हैं कि उनकी नई जिम्मेदारी उनके लिए एक अग्निपरीक्षा की तरह है। एक महिला में आत्मसम्मान के साथ काफी धीरता भी होती है। वह परिस्थिति को ज्यादा संवेदनशील तरीके से परख पाती है। उम्मीद है कि अरुणा एक महिला के रूप में यह सीख नए पुलिस अधिाकरियों को भलीभांति देंगी। अपनी नई नियुक्ति पर उन्होंने प्रसन्नता जताई है लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि उनका नया कार्यकाल उनके लिए खुद को साबित करने का एक मौका है। नई कसौटी पर अरुणा खरी उतरें, ऐसी शुभकामना सबकी है।

1 comment:

  1. आपको पहले भारतीय नारी ब्लाँग अब आपके ब्लाँग पर पढ़ रहा हूँ।

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