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Tuesday, July 6, 2010

नयी युद्धनीति


कूल्हों के झटकों पर
मौसम नहीं बदलते
शेयर दलालों की बांछें भले खिल जाएं
उघड़ी टांगों पर तैरती फिसलन
या तो बरसाती है
या सोची-समझी शरारत

पेज थ्री की जंघाओं में
मचलती जिन मछलियों ने
ड्राइंग रूम के लिए
इक्वेरियम का अविष्कार कराया है
समझ लेना होगा उन्हें
कि रैंप पर चलने वालों को
पहाड़ पर चढ़ना मना है

रेन डांस में लहराती गोपिकाओं से
जबरिया छीन लिया गया है
मटका भरने का हुनर
न्योन लाइट से सजे इश्तेहार
बस नीले हो सकते हैं
या हो सकते हैं खतरनाक लाल
पाबंदी है इनके सिंदूरी होने पर

रंग-बिरंगी लट्टुओं में नहायी दुनिया के
सबसे ताकतवर मदारी का डमरू
तांडवी हो जाता है
उम्रदराज झुर्रियों को देखकर
लंबी छरहरी गुस्ताखियों के लिए
शहर के हाशिये पर बना ओल्डएज होम
नया रिलिजियस स्पॉट है
कच्चे सूत से पक्की गांठ बांधने वाला
पंडित भी फूंक नहीं पा रहा कोई मंत्र
जिससे दुनिया के सारे फोटोग्राफरों के
निगेटिव एक साथ धुल जाएं

अलबत्ता सवाल यह भी है कि
अब तक आंगन लीप रही औरतों
कोहबर सजा रही लड़कियों की दुनिया
किस छाते में खड़ी है
किन जंघाओं में खेलती हैं ये
सपनों के किन बगीचों में मिल जाती हैं
नीम कौड़ियां इन्हंे आज भी

नया भूगोल ढूंढ़ रहे वास्कोडिगामा
है कमीज तुम्हारे पास
जिसे पहन तुम
नया सबेरा आंज रही
इन ललनाओं से मिल सको
खतरा है इतिहास लिख रहे
नये मिस्त्रियों के औजार
कहीं लूल्हे साबित न हों
संुदर पति पाने के लिए
अब भी सोमवारी करतीं
वीरांगनाओं की युद्धनीति समझने में

3 comments:

  1. शब्दों को बड़ी बखूबी से पिरोया है।

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  2. very creative and meeningful poem jo her us aadmi k liye he jo uljha hi ja raha he or kosis karta he har or fit hone ki

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  3. महानगर की जिंदगी का अच्छा चित्रण है।

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