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Sunday, March 6, 2011

निर्वस्त्र नियति


बीज का बीजक
प्रकृति के लिए पुराना
मानवीय ग्रंथियों के लिए
नया समाजशास्त्र भी है

एक पूरी पौध
याकि अव्वल एक गाछ
मटमैली निश्चिंत छाया
चहचहाटों की
चोंच से बने घोसले
कुछ रेंगती सचाइयों को
छिपाए कोटर

रंगीन सज
फलदार धज की
संवेदनशील संभावना
होती है हर बीज में
साथ में  होती है
एक काली कठोर
आशंका भी
उजड़ जाने की
परती पर पर्यावरण
रचने से पहले
बिखर जाने की

होता है हर संबंध
अपनी यात्रा से पहले
एक बीज ही
भरोसे की अनंत
चढ़ाई और ढलान
संभावना-आशंका की
निर्वस्त्र नियति

8 comments:

  1. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (7-3-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  2. सुंदर रचना ...... सुंदर बिम्ब के साथ विचारों की गहन अभिव्यक्ति.....

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  3. रंगीन सज और फलदार धज की
    संवेदनशील संभावना
    होती है हर बीज में

    सुंदर रचना -
    कुछ अलग सोच से सृजनात्मकता दर्शाई है

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  4. होता है हर संबंध
    अपनी यात्रा से पहले
    एक बीज ही
    भरोसे की अनंत
    चढ़ाई और ढलान
    संभावना-आशंका की
    निर्वस्त्र नियति

    खूबसूरत, संवेदनशील,सुंदर रचना

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  5. बहुत सुन्दर मार्मिक शब्दचित्र उकेरा है..बहुत सुन्दर प्रस्तुति..

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  6. होता है हर संबंध
    अपनी यात्रा से पहले
    एक बीज ही
    भरोसे की अनंत
    चढ़ाई और ढलान
    संभावना-आशंका की
    निर्वस्त्र नियति

    बहुत सुन्दर संवेदनशील रचना..

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  7. शुक्रिया मित्रों, रचनात्मक संबल और सराहना के लिए...

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  8. सुन्दर बिम्बो से सवारा है रचना को.

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