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Sunday, August 18, 2013

कुछ कहता है यह संन्यास


एक बड़ी सफलता पाना और फिर पूरी होड़ से बाहर हो जाना। ऐसा कोई भी फैसला सबसे पहले तो चौंकाता है। फिर इसे हम सीधे-सीधे पलायनवादी फैसला भी नहीं कह सकते हैं। अलबत्ता यह जानने की दिलचस्पी जरूर बढ़ जाती है कि ऐसे हठात निर्णय के पीछे असली वजह क्या रही होगी। फ्रांस की टेनिस स्टार मरियन बार्तोली को लेकर इन दिनों ऐसी ही कुछ बातें हो रही हैं। 28 साल की बार्तोली ने हाल ही में विंबलडन में महिला एकल का खिताब अपने नाम किया था। लोगों की निगाहें अब इस बात पर थी कि क्या बार्तोली यूएस ओपन में भी अपनी जीत का सिलसिला बना रख पाएंगी। लोग अभी इस बारे में कयासबाजी में ही लगे थे बार्तोली ने खेल से संन्यास लेने का फैसला लेकर सबको चौंका दिया। यूरोपियन मीडिया में इस पर काफी कुछ लिखा-कहा जा रहा है। बार्तोली ने इस बारे में सिर्फ इतना कहा है,'मैंने यह फैसला आसानी से नहीं लिया है।’
फैसला लेने की जो बड़ी वजह बार्तोली ने बताई वह चोट और दर्द से बढ़ी परेशानी थी। पर लोग मानने को तैयार नहीं हैं कि वजह इतनी भर होगी। कुछ और बातें भी इस दौरान चर्चा में आईं। विंबलडन में बार्तोली के मैदान में उतरने से करीब घंटे भर पहले बीबीसी के कमेंटेटर जॉन इनवरडेल ने एक भद्दी टिप्पणी की। इनवरडेल ने कहा, 'वह कम से कम अपनी संुदरता के लिए तो नहीं जानी जाएगी।’ बाद में इस मामले में बीबीसी को बार्तोली से माफी मांगनी पड़ी। एक 28 साल की महिला के खेल जीवन की सार्वजनिकता में प्रताड़ना और मानसिक रूप से ठेस पहुंचाने के मौके कितने आते होंगे, यह इस प्रकरण से जाहिर है।
फ्रांस की इस स्टार टेनिस खिलाड़ी ने जरूर कहा है कि उसने शरीर पर कई चोट और दर्द से आजिज आकर टैनिस रैकेट रखा है। पर मुमकिन है कि उसके मन पर और भी कई घाव हों। खेल और ग्लैमर का साझा अब जरूरी है। इसकी अवहेलना करके कोई आगे बढ़ना चाहेगा तो शायद वह उसी हश्र तक पहुंचेगा जहां बार्तोली पहुंची हैं। हालांकि ऐसे किसी निष्कर्ष पर बार्तोली खामोश हैं।
आम महिला टेनिस खिलाड़ियों के मुकाबले थोड़े ठिगने कद की बार्तोली का जन्म दो अक्टूबर 1984 को हुआ। 16 साल की उम्र में उसने यह तय कर लिया कि उसकी जिंदगी का मैदान टेनिस कोर्ट ही होगा। इससे पहले उसके पिता उसे डॉक्टर बनाना चाहत ेथे। बाद में पिता को भी बार्तोली का फैसला सही लगा। पिता ही उसके टेनिस कोच बने। पिता और बेटी का गुरु-शिष्या का संबंध बेटी के खेल जीवन को अलविदा कहने तक जारी रहा। अपने अब तक के करिअर में बार्तोली ने आठ डब्ल्यूटीए सिंगल और तीन डबल्स के टाइटल जीते। अभी वह दुनिया की सातवें नंबर की टेनिस खिलाड़ी हैं।
इस शिखर आरोहण में जिस एक बात से बार्तोली हमेशा दूर रही वह थी ग्लैमर और गॉसिप की दुनिया। उनसे जब इनवरडेल की टिप्पणी के बारे में पूछा गया तो उसने न चाहते हुए भी यह कह दिया कि वह मॉडल अगर बन नहीं सकतीं तो बनना चाहती भी नहीं। उसे चैंपियन बनना था और वह उसने बनकर दिखा दिया। गौरतलब है कि इनवरडेल ने अमर्यादित तरीके से बार्तोली के चेहरे और कद के साथ टांगों तक पर अश्लील टिप्पणी की थी। कहना नहीं होगा कि इस स्टार टेनिस खिलाड़ी के संन्यास ने खेल और पुरुष मानसिकता के बीच महिला अस्मिता की सुरक्षा के मुद्दे को कहीं न कहीं चर्चा में ला दिया है।
nationalduniya.com

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