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Monday, August 12, 2013

अनर्थ रोको रघुराम


रघुराम राजन। एक अनसुना नहीं तो बहुत जाना-सुना नाम भी नहीं। पर यह सच कल तक का था। अब तो राजन चर्चा में हैं। आखिर उन्हें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का नया गवर्नर जो नियुक्त किया गया है। स्वभाव से मितभाषी और एकेडमिक माने जाने वाले राजन के लिए यह खुशी के साथ फL का मौका है। वैसे उन्हें अपने ऊपर आने वाली चुनौतियों का भी भान है। जिस दिन आरबीआई के नए गवर्नर के रूप में उनके नाम का ऐलान हुआ, उसी दिन सेंसेक्स ने 449 अंकों का गोता लगाया । रुपया तो लुढ़ककर डॉलर के मुकाबले अपनी सबसे कमजोर स्थिति में आ गया।
ऐसे में भी राजन ने अपनी तरफ उम्मीद से देखने वालों को किसी खुशफहमी में नहीं रखा। सीधे-सीधे कहा, 'मेरे पास कोई जादू की छड़ी नहीं है।’ दरअसल, यह नाउम्मीदी के बोल नहीं, बड़बोला होने से बचने वाला बयान था। राजन की शख्सियत है भी ऐसी ही। दिखावे से ज्यादा कोशिश करने और करके दिखाने में यकीन। उन्हें देखें, उनसे मिलें, बात करें तो उनका अनुशासित जीवन आप पर अपनी छाप जरूर छोड़ेगा। किसी फौजी अफसर की तरह कसी हुई लंबी कद-काठी। धुली हुई आंखें। चमकता ललाट। सिर पर छोटे-छोटे बाल। आमतौर पर फॉर्मल पहनावा। उपस्थिति ऐसी कि जैसे हमेशा कुछ खास करने को तत्पर।
राजन को जानने वाले कभी उन्हें सीधे-सीधे इकोनमिस्ट कहने के बजाय 'एकेडमिक इकानमिस्ट’ कहते हैं। यह उनका अलंकरण नहीं है। बल्कि यही उनका ट्रैक रिकार्ड रहा है। पढ़ाई के दौरान अव्वल आना और स्वर्ण पदक जीतना उनके लिए कभी आपवादिक नहीं रहा। दरअसल, श्रेष्ठता की इस कसौटी पर खरे होने का ही नाम है रघुराम जी. राजन।
तीन फरवरी 1963 को भोपाल में जन्मे राजन के पिता नौकरशाह थे। पढ़ाई-लिखाई में दिलचस्पी के पीछे एक बड़ी वजह घर का माहौल भी रहा। राजन ने पहले इंजीनियरिंग की तरफ रुख किया। बाद में उन्हें भा गई अर्थ और प्रबंधन की साझी दुनिया। 1985 में आईआईटी दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्वर्ण पदक के साथ स्नातक। फिर आईआईएम से स्नातक और वहां भी स्वर्ण पदक। 1991 में एमआईटी से पीएचडी।
2००3 में अमेरिकन फाइनेंस एसोसिएशन ने राजन को प्रतिभाशाली युवा अर्थशात्री के रूप में सम्मानित किया। यह सम्मान उन्हें वित्तीय सिद्धांतों और उनके अमल की प्रक्रिया को लेकर किए कार्यों के लिए दिया गया। यह राजन की प्रसिद्धि और साख का ही कमाल है कि जिस संस्था ने उन्हें सम्मानित किया, वे 2०11 में उसके अध्यक्ष बने।
राजन की आर्थिक समझ और दूरदर्शिता कितनी अचूक है, इसका अंदाजा 2००8 में आई वैश्विक मंदी को लेकर 2००5 में उनकी भविष्यवाणी से लगाया जा सकता है। उनकी इस भविष्यवाणी की पूरी दुनिया में सराहना हुई और इस पर एक डाक्यूमेंट्री भी बनी, 'इनसाइड जॉब’ नाम से। इस डाक्यूमेंट्री को भी कई पुरस्कार मिले। राजन की एक किताब का नाम है- 'सेविंग कैप्टलिज्म फ्रॉम द कैप्टलिस्ट्स’। जाहिर है कि उनके अर्थ चिंतन में ग्लोबल इकोनमी को लेकर कोई प्रतिगामी आग्रह भले न सही पर वे इसके सीधे-सीधे हिमायती भी नहीं हैं। उनकी इसी समझ और कुशलता को देखते हुए 2००8 में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें मानद रूप में आर्थिक सलाहकार नियुक्त किया। 2०12 में उन्होंने प्रमुख आर्थिक सलाहकार कौशिक बसु की जगह ली।
अब जबकि राजन अपने जीवन की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण जवाबदेही को संभालने जा रहे हैं तो सबकी निगाहें उन पर हैं। देश आर्थिक लिहाज से एक मुश्किल दौर में है। देश उन्हें एक कुशल आर्थिक प्रबंधक के रूप में याद करना चाहता है। राजन की योग्यता इस चाहत को अधूरी नहीं रहने देगी। यह भरोसा सबको है और यही उनके प्रति सबकी शुभकामना भी।

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