LATEST:


Friday, October 7, 2011

महात्मा की लीक पर ब्रह्मचारी प्रतीक


गांधी के ब्रह्मचर्य  प्रयोग पर सवाल और विवाद की धुंध आज भी छटी नहीं है। किताबें जो महात्मा के जीवन को लेकर लगातार आ रही हैं, उनमें उनके इस प्रयोग को हॉट सेक्सुअल टॉपिक  की तरह उठाया गया है। किताब को बेस्ट सेलर का तमगा दिलाने के लिए लेखकों ने गांधी के लिखे पत्र और लेख तो क्या हर उस वाक्य को खंगाला है जहां कहीं भी उन्होंने किसी महिला का नाम लिया है या फिर उनको लेकर शब्दों और भावों में किसी तरह की लैंगिक संवेदना के संकेत मिले हैं। गांधी अपने किए को लेकर खासे खुले थे। उनके 'गोपन' का यह 'ओपन' उनके जीवन संदर्भों और प्रयोगों को समझने में जितने कारगर नहीं हुए, उससे ज्यादा इनका इस्तेमाल विषय को विषयी बनाने में किया गया। नहीं तो यह कतई नहीं होता कि आत्मानुशासन को अपनी अहिंसक जीवनशैली का सबसे जरूरी औज़ार की तरह इस्तेमाल करने वाले महात्मा के जीवन को हम महज एक सेक्सुअल बिहेवेरियल लेबोरेटरी की तरह देखते।
बहरहाल गांधी और ब्रह्मचर्य से शुरू हुई चर्चा में बात एक नए और सामयिक संदर्भ की।  टीवी पर बिग बॉस का सीजन फाइव शुरू हो चुका है। उधर, बॉलीवुड के नए और उभरते कलाकार प्रतीक बब्बर इन दिनों अपनी फिल्म के हिट होने के लिए एक अनोखी प्रतिज्ञा के लिए चर्चा में हैं।  बिग बॉस की रियलिटी का धरातल पिछले सीजन में जितना बदला था, नए सीजनमें वह बदलाव प्रायोगिक हिमाकतों की नई दहलीज छू रहा है। शो का पौरुष और चारित्रिक बल बनाए रखने का जिम्मा शक्ति कपूर को दिया गया है तो, वहीं उनकी जिम्मेदारी का इम्तहान लेने के लिए बारह यौवनाओं का हुजूम इकट्ठा किया गया है। पिछले सीजन में लिहाफ की हलचल देखकर दर्शकों ने प्रेमी युगल की अंदरूनी कार्रवाई के रोमांच का अनुभव किया था। नए सीजन में अंदरूनी हलचल को खुले में लाने की मंशा साफ जाहिर होती है। पर तारीफ करनी होगी उन सितारे होस्ट्स की जिन्होंने शो की मेजबानी का फैसला तो बतौर प्रोफेशनल किए पर शक्ति कपूर की बिग बॉस के घर में एंट्री से पहले न तो उनसे कोई सीधी बात की और न ही दर्शकों से उनका कोई औपचारिक परिचय कराया। और तो और उनकी एंट्री के बाद बगैर उनका नाम लिए यहां तक कह दिया कि अच्छा हुआ बिग बॉस ने उन्हें (शक्ति को) अपने घर बुला लिया, नहीं तो वे किसी के घर जाने लायक नहीं थे। करीब 700 फिल्में करने के बाद एक सिने आर्टिस्ट का कद जितना दमदार और ऊंचा होना चाहिए था शक्ति ने उसे अपने ढीले कैरेक्टर के कारण ही कहीं न कहीं गंवाया है। देखना अब यह होगा कि इस रियलिटी शो में वे इस दाग को कुछ कम करना पसंद करेंगे या और ज्यादा दागदार हो जाएंगे।
शक्ति के बाद बात प्रतीक प्रसंग की। यह प्रसंग हमारे समय की युवा चेतना को समझने का नया प्रस्थान बिंदु भी बन सकता है। प्रतीक बब्बर हिंदी सिनेमा का नया चेहरा तो हैं ही उन्होंने कुछ ही दिनों और कुछ ही फिल्मों के बाद एक प्रतिभाशाली कलाकार की शिनाख्त पा ली है। प्रतीक ने अपनी नई रिलीज होने वाली फिल्म 'माई फ्रेंड पिंटो' की सफलता की कामना कुछ अनूठे अंदाज में की। उन्होंने यह प्रण उठाया है कि जब तक उनकी फिल्म रिलीज नहीं हो जाती, वे सेक्स नहीं करेंगे। दिलचस्प है कि यह प्रण एक युवा और अविवाहित कलाकार का  है। आमतौर पर सितारे अपनी फिल्म की सफलता के लिए दरगाहों और मंदिरों की दहलीज चूमते हैं पर प्रतीक इस मामले में सबसे अलग निकले। बताया जा रहा है कि अपने प्रण को जोखिम में नहीं डालने के लिए वे एहतियाती तौर पर बॉलीवुड. की आए दिन होने वाली लेट नाइट पार्टियों और फंक्शनों में जाने से बच रहे हैं।
प्रतीक का प्रण कहीं न कहीं उनकी और उनके जैसे युवाओं की जिंदगी की सच को भी बेबाकी से बयां करता है। मेल-मुलाकात और दोस्ती के दायरे में आज सब कुछ जायज है, कुछ भी वज्र्य या त्याज्य नहीं। यह दायरा न सिर्फ नए संबंधों के नए धरातल को चौड़ा और मजबूत कर रहा है बल्कि तरोताजगी से भरी उस युवा मानसिकता को भी बयां करता है, जो संबंध, परिवार और परंपरा की लीक को अपनी सीख के साथ बदल रहा है।
ऊपर बयां किए गए सारे हवाले हमारे सामने कई सवाल उठाते हैं। हमारे समय की ताकत और दिलचस्पी किन बातों में है? समाज और देश की सरहद लांघ चुके नफरत के दौर में प्रेम जिन अंत:करणों में आज भी महफूज है, उनके लिए इसका महत्व क्या है? क्या संबंधों का दैहिक तकाजा इतना भारी है कि उसके लिए संयम की कसौटी का सर्वथा त्याग जरूरी मांग हो गया है? ऐसा क्यों है कि देह को लेकर संदेह को मिटाने वाले हिमायतियों में हम, हमारे समय और हमारे समाज से भी आगे वह बाजार है जिसकी भूमिका को लेकर अपने तरह के संदेहों का जाला आज भी बना हुआ है।
एक बात जो इस पूरे संदर्भ में कही जा सकती है कि सेक्स, सक्सेस और सेंसेक्स के दौर में संबंध और संवेदना के हवाले भी बदल गए हैं। ये आत्मीय प्रसंग अपनी धीरता और गंभीरता को गंवाते जा रहे हैं। फौरीपन के नशे ने कॉफी और प्रेम दोनों को चुस्कीदार जायके में बदल दिया है। मन का सफर लंबी डग से नहीं पूरा किया जा सकता और फौरी आवेग से हासिल होने वाला स्पर्श दैहिक ही हो सकता है आत्मीय तो कदापि नहीं। तभी तो आत्मानुशासन की धीरता के हमारे समय के सबसे बड़े पैरोकार महात्मा को भी लोगों ने नहीं बख्शा। हम अपने समय और उसकी संवेदना को किस 'शक्ति' और किस 'प्रतीक' से बयां करना चाहेंगे, यह हमारे ऊपर है। 

7 comments:

  1. Ladko ke liye Sex unki Zindagi ka ahem hissa hai ..Aur Ladkiya isse alag andaaz mei dekhti hai... Aaj kal prem pyar ki baatein karta hi kaun hai jis tarah se channels yuvao ke programme dikha rahe hai ..so called reality shows ..wahan se yahi pata chalta hai ki sex is nt a big deal now..its a casual thing..shaadi shuda hona ya na hone ka koi auchitya hi nahi hai.... isse .."part of life" ki tarah dekha jaane laga hai.... Pratigya karna aur palan karna do alag baatein hai jitni joro se jo pratigya li jaati hai utni hi jaldi woh toot jaati hai bass tootne ki aawaz nahi aati.... who cares ..Prateek is nt a big name bt yup sure he represent Indian youth.

    ReplyDelete
  2. "Ladko ke liye Sex unki Zindagi ka ahem hissa hai ..Aur Ladkiya isse alag andaaz mei dekhti hai..."
    VAISSHALI ...MAI PURI TRAH SAHMAT HUN APKI RAI SA..!

    ReplyDelete
  3. फौरीपन के नशे ने कॉफी और प्रेम दोनों को चुस्कीदार जायके में बदल दिया है।
    आपका विश्लेषण प्रभावित करता है। आत्मसंयम खोने वाले इस विषय को जितना भुनाना चाहें भुना लें, पर हाल वही होगा जो शोएब अख़्तर का आज के दिन में हो रहा है।

    ReplyDelete
  4. धैर्य की कमी प्रेम से बहुत दूर ले जाती है । प्रेम को भी चाय की चुस्की ही समझा जाने लगा है।

    ReplyDelete
  5. आत्मा वात्मा की बात कोई सोचना करना नहीं चाहता आजकल..

    आत्मानुशाशन....यह कौन सोचेगा...

    भोग ही जब जीवन का परम हो तो योग की कौन सोचेगा या समझेगा..

    सार्थक विवेचना की आपने...साधुवाद...

    ReplyDelete
  6. सेल्फ कण्ट्रोल नाम की चीज़ अब रही ही कहाँ है.फिर वह प्रेम हो या कुछ और.
    प्रभावित करता है आपका विश्लेषण. .

    ReplyDelete